बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) को निर्देश दिया कि वह मंत्रालय, बॉम्बे हाईकोर्ट की कैंटीन सहित सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी भोजनालयों का निरीक्षण करे तथा उनकी स्थिति संबंधी रिपोर्ट और निरीक्षण की वीडियो रिकॉर्डिंग अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे।
यह निर्देश नवी मुंबई स्थित पार्क इन बाय रैडिसन होटल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। होटल ने इस महीने की शुरुआत में FDA द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद उसके रेस्तरां का FSSAI लाइसेंस निलंबित किए जाने को चुनौती दी है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घाटगे और न्यायमूर्ति गौतम आंखड़ की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या FDA का चल रहा निरीक्षण अभियान सरकारी प्रतिष्ठानों तक भी पहुंचा है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या नेताओं के स्वामित्व वाले रेस्तरां का भी निरीक्षण किया गया है।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की कैंटीनों सहित कई सरकारी भोजनालयों का निरीक्षण किया गया है और नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर कुछ को बंद भी किया गया है।
सरकारी वकील नेहा भिडे ने अदालत को बताया कि FDA की कार्रवाई में किसी प्रकार की “चुनिंदा कार्रवाई” (Pick and Choose) नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि BMC, केईएम अस्पताल, क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (CCI) तथा मुंबई के अन्य प्रमुख क्लबों की कैंटीनों का भी निरीक्षण किया गया और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के कारण उन्हें भी बंद किया गया।
अदालत ने FDA को निर्देश दिया कि वह मंत्रालय, हाईकोर्ट की कैंटीन सहित सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी भोजनालयों का निरीक्षण कर उनकी वास्तविक स्थिति का पता लगाए तथा निरीक्षण की वीडियोग्राफी भी कराए।
पार्क इन होटल के संबंध में अदालत ने पूछा कि कथित उल्लंघनों को देखते हुए होटल का लाइसेंस लगातार निलंबित रखना क्या उचित और अनुपातिक कार्रवाई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मयूर खांडेपारकर और सागर शेट्टी ने पक्ष रखा।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि होटल को निरीक्षण में 95 प्रतिशत अनुपालन (Compliance) अंक प्राप्त हुए थे, लेकिन रसोई क्षेत्र में कीड़े पाए जाने के कारण लाइसेंस का निलंबन जारी रखा गया।
नेहा भिडे ने दलील दी कि खाद्य सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “एक कीड़ा हो या दस, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। इस प्रकार के उल्लंघन को स्वीकार नहीं किया जा सकता।” उन्होंने यह भी बताया कि कानून के तहत होटल के पास फूड सेफ्टी कमिश्नर के समक्ष अपील करने का वैधानिक अधिकार उपलब्ध है।
हालांकि, खंडपीठ ने सवाल उठाया कि जब होटल ने अधिकांश निर्धारित मानकों का पालन किया है, तो केवल इस एक उल्लंघन के आधार पर लाइसेंस निलंबित रखना क्या उचित है।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की, “पिछले सप्ताह हमारी मेज पर भी एक कॉकरोच था। यहां एक मक्खी भी है। हम भारत में हैं, मैडम। हमें वास्तविकता को भी समझना होगा।”
अदालत ने कहा कि वास्तविक प्रश्न यह है कि क्या हर छोटे उल्लंघन पर, सुधारात्मक कदम उठाने और अधिकांश मानकों का पालन होने के बावजूद, किसी प्रतिष्ठान को निलंबित रखना उचित है।
खंडपीठ ने मौखिक रूप से संकेत दिया कि वह याचिकाकर्ता को राहत देने के पक्ष में है। अदालत ने कहा कि लाइसेंस निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई केवल गंभीर मामलों में ही की जानी चाहिए, न कि हर प्रकार की अनियमितता पर।
यह विवाद 2 जुलाई को FDA अधिकारियों द्वारा पांच सितारा इन बाय रैडिसन होटल में किए गए औचक निरीक्षण के बाद शुरू हुआ था। निरीक्षण में खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की रिपोर्ट मिलने पर अगले ही दिन नामित अधिकारी ने होटल का FSSAI लाइसेंस निलंबित कर दिया, जिससे होटल की सभी खाद्य संबंधी सेवाएं बंद करनी पड़ीं।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।
